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Poems

 तुम्हारी शिकायतों की चिट्ठी पढ़ कर

 

तुम्हारी शिकायतों की चिट्ठी पढ़ कर

ऐसा लगता है

कुछ पल और ऐसे ही जी लें

क्योंकि खुद को इसके हिसाब से चलाने के बाद

भले ही तुम हमे चाहने लागो

पर हम खुद को चाह नही पाएँगे