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Poems

 अजीब अजीब से पहलुओं से कई बार

 

अजीब अजीब से पहलुओं से कई बार
कुछ इस तरह सामना हो जाता है
चलते चलते रास्तों पर 
होसला डगमगा जाता है,
जिस सोच से कभी नही
घबराएँ हों,
जिस सोच से कभी नही
घबराएँ हों...........
उस के आगे सिर ,
झुकाया जाता है
मजबूरन
ज़ुबा तो स्वीकार कर लेती है
पर ये मन
उसे स्वीकार नहीं कर पाता ह

वाह रे ए वक़्त 

तू भी किस किस तरह 
पलट कर आता है.........
पल में ज़िंदगी को तमाशा दिखा जाता है...........