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Poems

 गर रूठो तो मानना भी सीखो

 

गर रूठो तो मानना भी सीखो
क्योंकि रूठे को मानाने में 
मज़ा तभी आता है
जब वो हमारी शक्ति के भीतर 
मान जाता है,
क्योंकि
तज़ुर्बा कहता है
गर रूठने वाला ......
मानाने वाला की शमता को पार कर ले
तो एक खूबसूरत डाली उसके जीवन की टूट जाती है
वो स्वीकार कर ले............