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Poems

 आशिकी बढ़ती गई

 

आशिकी बढ़ती गई

जैसे जैसे हमारी शायरी से

दागा देने वाले दोस्त कम हो गए

जो दिल से नही, दिखावे के लिए जुड़े थे

वो दूर हो गए...........

और जो मन से चाहते थे

पर कह नही पाते थे

वो बहुत खूब - बहुत खूब कह करीब हो गए..........................