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Poems

 झुकना मुनसिफ़ समझा हमने

 

झुकना मुनसिफ़ समझा हमने

क्योंकि रिश्तों का पल्ला भारी निकाला,

हमने सोचा हम एकेले जी लेंगें

पर इस सोच में घरहमारा खाली निकला,

सही और ग़लत की परिभाषा हम जानते नही

पर उनके बिना जीना मुश्किल निकला,

अब चाहे वो हमें कुछ भी समझे

हमने जब साथ निभाने की फिरसे ठानी.........

तो हमारा मन भी हमारे साथ ही निकला....................