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Poems

 वक़्त ने एक बार फिर

 

वक़्त ने एक बार फिर

तुम्हें मेरी मंज़िल का किनारा बनाया है

अब तो मुझे क़ुबूल कर लेना

पहले तो तुमने मुझे ठुकराया है,

मैने शिकायत तो तभ भी ना की थी

मान लिया था

मेरी महोब्बत में कमी थी,

पर अब वफ़ा का पल्ला मेरा भारी है

अंजाम अबभी जोहो

याद रखना सनम....................

ये दीवानी हमेशा तुम्हारी थी..........तुम्हारी है........