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Poems

 आँसुओं के बेह्ते तक्दीर खुद ब खुद तस्वीर बन गई

 

आँसुओं के बेह्ते
तक्दीर खुद ब खुद तस्वीर बन गई,
बहोत कोशिश की फिर बदलने की
पर वो तस्‍वीर शीशे मे जड़ गई,
क्या खूब कहा है किसी ने.........
औरत का अपना कोई वजूद नही
जब वो माँगे तभ नाजायज़ मे
जब उसे मिले स्वीकार करे तभी...............