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Poems

 रूठ गई अगर ज़िंदगी

 

रूठ गई अगर ज़िंदगी 

उसे मनालो

जो अब तक सो रहा है

जतन कर उसे जगालो,

जो रिश्ते पियार की डोर से बँधे हैं

उन्हें निभलो

यदि समय की कमी है

तो कुछ भी करो ..... उसे निकालो

फलसफा ज़िंदगी का बहुत आसान है

उसे सुलझालो,

जो आज तुम्हारे लिए खड़ा है

उसके संग तुम भी कदम बढ़ालो,

मत भुनो खुद को इस भागती हुई ज़िंदगी की लड़ाई में.........

जो तुम्हारे संग मन लगाए बैठा है

तुम उसके संग मन लगालो,

हफ्ते में एक शाम दोस्तो के संग बितालो,

जो जिस पल मिल जाए

उस पल उसके मज़े उतालो...............