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Poems

 माँ के आँचल से सिमट कर

 

माँ के आँचल से सिमट कर

आँख भरती हैं क्यों

देख उसका चेहरा मेरी

उदासी ढलती है क्यों ,

क्या है ये रिश्ता

कोई जाने ना.............

क्या है ये रिश्ता

कोई जाने ना.............

 

जब भी डरता दिल

मुख से माँ ही….. निकता है क्यों,

उसके चरणों में मुझको

जन्नत मिलती है क्यों,

क्या है ये रिश्ता

कोई जाने ना

क्या है ये रिश्ता

कोई जाने ना.............

 

हाथ से उसके मैं खा कर

दही निकल ता हूँ क्यों,

बिन कहे जो समझ जाती

माँ ही केवल क्यों,

क्या है ये रिश्ता

कोई जाने ना

क्या है ये रिश्ता

कोई जाने ना.............

 

 

दिन में जो तारे दिखला दे

सिर्फ़ माँ है मेरी क्यों,

गले लगा कर मुझे सैलती

 माँ ही मेरी क्यों,

जब चली जाती है वो

इतनी याद आती है क्यों

क्या है रिश्ता कोई जाने ना

कौन हमे खींचता

कोई जाने ना............

तुझेमे रब दिखता

तू ना जाने मेरी माँ.........