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Poems

 उस वक़्त को करते सलाम

 

उस वक़्त को करते सलाम

जिसकी नस नस में बसा था सम्मान ,

चाहे भिन थी जातियाँ

पर सबका एक ही लक्श था

दिलों में सुकून था

हर कोई प्रेम का भक़्त था,

चुलेह पर पकती थी रोटी

अमन की जलती थी ज्योति,

खुद को हम बुलाते थे

असल मज़े ज़िंदगी के

मिल बाँट उठाते थे,

आज दो कदम भी एकेले हैं

तन्हाईओं से भरे मेले हैं......