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Poems

 मेरी खामोशी खामोश हूँ

 

मेरी खामोशी

खामोश हूँ

गुनेहगर नही

मैं पियार कर सकता हूँ

व्यापार नहीं,

रिश्तों की एहमियाद समझता हूँ

इसलिए उन्हें सिर - आँखों पर रखता हूँ,

दुख ये है

कि , कोई मेरी खामोशी को पढ़ नहीं सका

और

मुझे सिवा इन रिश्तों के कभी कोई नही दिखा....