27
Mar

सोच रहा गुनाह कर ही लेता हूँ

सोच रहा गुनाह कर ही लेता हूँ थक गया हूँ खुद को बेगुनाह साबित करते करते

27
Mar

मैं जब भी जहाँ भी जैसे भी जन्म लूँ,

मैं जब भी जहाँ भी जैसे भी जन्म लूँ, खुश हूँ अगर बिटिया बनूँ क्योंकि डरते नही हम ज़माने की मार से जीत से या हार से  , क्योंकि मैं जानती हूँ कि हम कमज़ोर नही हम जो जब ठान लें कर सकते हैं तभी …………. happy womens day

27
Mar

कितने ही आँसुओं को समेट लिया ना मिला वो शक्स जिसने मेरी मुस्कुराहट के

कितने ही आँसुओं को समेट लिया ना मिला वो शक्स जिसने मेरी मुस्कुराहट के पीछे मुझे रोते हुए देख लिए , दोस्त हज़ारों है पर कोई गले नही लगा पा रहा जो चाहते हैं मुझे , उनको मैं कमज़ोर पढ़ता हुआ दिखा नही पा रहा क्यों हैं ये फासलें आँसुओं और अपनों के बीच में मन की हार और मन

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27
Mar

क्या? यूँ ही इंतेज़ार में तुम्हारे बैठा हूँ? महोब्बत है तुमसे बार बार कहता हूँ

क्या? यूँ ही इंतेज़ार में तुम्हारे बैठा हूँ? महोब्बत है तुमसे बार बार कहता हूँ कब तक मज़ाक समझ मेरे इश्क़ को नज़र अंदाज़ रखोगे ? आख़िर कब तक मुझे परखोगे ? कोई कमी लगती है तो बोल कर तो देखो बाल दूँगा खुद को फिर तोल कर देखो , छोड़ूँगा नही रहें तुम्हारी ये वादा है जैसा भी है

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27
Mar

आओ मिलकर इस तरह मनाएँ होली

आओ मिलकर इस तरह मनाएँ होली गुलाल लगा बन जाएँ हमजोली, प्रेम से भरी भांग खिलाएँ बुराई पर अच्छाई के विजय गीत गाएँ, गुंजिया में भरे रिश्तों की मिठास जो है उसमे रखे  विश्वास, देश की उन्नति के प्रति अपना फ़र्ज़ निभाएँ सीमा पर बैठे सैनिकों के साथ साथ आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ

27
Mar

ना देखा तुझे तो क्या फ़ायदा है जीने से…… मिलता नही तू मुझे

ना देखा तुझे तो क्या फ़ायदा है जीने से…… मिलता नही तू मुझे मंदिर , मज़्ज़िद , गुरुद्वारे में जब ढूँढते- ढूँढते पहुँचता हूँ मैं तुझे तेरे दुवारे में , बस्ता है अगर तू दिल में तू क्यों बैठा चॉबारे में , ठोकर खिलवाकर ही पहुँचता तू किनारे में , इश्क़ की नुमाईश हुई मेरी तब तू कहाँ था ठुकराए

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27
Mar

माना कि तुझे देख इस बाग के फूल खिल जाते हैं

माना कि तुझे देख इस बाग के फूल खिल जाते हैं पर हमने भी दोस्ती तुम्हारी खातिर काँटों से की है जो तुम्हारे फूल को छूने से पहले पिघल जाते हैं …………….

27
Mar

मन की बात है मन के साथ है

मन की बात है मन के साथ है , खामोश शब्द हैं मगर गहरा एहसास है हर वक़्त अपना है मानो तो हक़ीक़त वरना सपना है मुझे मिलें हैं मेरे खुवाब मुझे मिला है मज़र मुझे मिला है ज़फ़र का सफ़र

27
Mar

कहा था किसी ने कि तुम बहुत खूब लिखते हो

कहा था किसी ने कि तुम बहुत खूब लिखते हो हम कहते है कि खूबसूरती लिखने वाले से ज़्यादा पढ़ने वाले में होती है ….. क्योकि हम तो खामोश शब्दो को दिल से उतारने का काम करते हैं और आप उन में आवाज़ा भर उन्हें सराहने का काम करते हैं हम लिखे बिना अधूरे हैं हमारी कविताएँ आपके बिना अधूरी

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27
Mar

हार ही माननी होती तो आपसे यहाँ मिलने नही आते

हार ही माननी होती तो आपसे यहाँ मिलने नही आते हम तो खुद को जीतने चले हैं……………. यूँ ही नही घर से निकले हैं ………….. महोब्बत में सारे बाज़ार तुम्हें आवाज़ नही देंगे वादा करते हैं तुम खुद बाहों में भर कर महोब्बत का इज़हार करोगे ये दावा करते है……….