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Hindi Poems

  • कब्र ताक में बैठी थी हमसे मिलने की आरज़ू लिए

    कब्र ताक में बैठी थी

    हमसे मिलने की आरज़ू लिए

    1
  • भाव हैं भाषा है, सेवा है संस्कार है,

    भाव हैं

    भाषा है,

    सेवा है

    संस्कार है,

    2
  • रज़ा में उसकी एक अदा है वो जब जो देता है

    रज़ा में उसकी एक अदा है

    वो जब जो देता है

    उस ही में मज़ा है

    जन्मअष्टमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ

    3
  • उसकी शक्सियत का लिबास फीका था पर वो मेरे लिए ही जीता था

    उसकी शक्सियत का लिबास फीका था

    पर वो मेरे लिए ही जीता था

    4
  • दर्द नही आँखों में दास्तान है

    दर्द नही आँखों में

    दास्तान है

    5
  • माँ के आँसुओं से आवाज़ आई जिसके लिए मैं सारी दुनिया से लड़ी

    माँ के आँसुओं से आवाज़ आई

    जिसके लिए मैं सारी दुनिया से लड़ी

    6
  • स्वतंत्रता दिवस की शुभ कामनाएँ आओ देश की वीरों को याद कर

    स्वतंत्रता दिवस की शुभ कामनाएँ 
    आओ देश की वीरों को याद कर

    7
  • ज़िंदगी उलझ गई तो क्या हुआ

    ज़िंदगी उलझ गई

    तो क्या हुआ

    8
  • माँ आँसुओं की आवाज़ सुन लेती थी

    माँ

    आँसुओं की आवाज़ सुन लेती थी

    9
  • मुझे जाना है उस डगर जिसका पता नही.......

    मुझे जाना है उस डगर

    जिसका पता नही.......

    10
  • गिर गया तो संभाल लेते हैं फँस जाउँ निकाल देते हैं,

    गिर गया तो संभाल लेते हैं

    फँस जाउँ निकाल देते हैं,

    11
  • कुछ बातों के भवर में मैं धंस गया था

    कुछ बातों के भवर में मैं धंस गया था

    इसलिए रास्तों पर फँस गया था

    12
  • माना मैं कबीरा नही माना मैं कोई हीरा नही

    माना मैं कबीरा नही

    माना मैं कोई हीरा नही 

    13
  • मन के धागे तोड़ मत

    मन के धागे तोड़ मत

    अनकही बातों के लपेटे में आकर छोड़ मत

    14
  • बेवफ़ाई की जैसे ही हमने हमारे दर्द से

    बेवफ़ाई की जैसे ही

    हमने हमारे दर्द से

    15
  • सुकून की चाह में सुख की रोटी ढूढ़ रहा था,

    सुकून की चाह में

    सुख की रोटी ढूढ़ रहा था,

    16
  • गुरु पूर्णिमा पर हर उन विचारों , संस्कारों , वक़्त , इंद्रियों और साक्षात्कार गुरु

    गुरु पूर्णिमा पर

    हर उन विचारों संस्कारों वक़्त इंद्रियों और साक्षात्कार गुरु

    17
  • कोई अपना एक पल में हमारा दिल तोड़ कर चला जाता है

    कोई अपना एक पल में

    हमारा दिल तोड़ कर चला जाता है

    18
  • खोज रहा हूँ उसको, जिसका कोई अस्तित्व नही

    खोज रहा हूँ उसको

    जिसका कोई अस्तित्व नही

    19
  • दूरियाँ इतनी बढ़ा दी तुमने कि अब पास आने से भी

    दूरियाँ इतनी बढ़ा दी तुमने

    कि अब पास आने से भी

    20
  • ख़याल है तुम्हारा हमारे हर अफ़साने में

    ख़याल है तुम्हारा हमारे हर अफ़साने में

    फिर क्यों आते हैं तुम्हें मज़े हमे सताने में

    21
  • बेगैरत ना तो वक़्त है

    बेगैरत ना तो वक़्त है

    ना ही है किसी अपने का दोष

    22
  • अजब सी परिस्थितियों में हम रहते हैं

    अजब सी परिस्थितियों में हम रहते हैं


    आँख से आँसू

    23
  • खूबसूरत है हर वो दिल जो किसी के मन की बात समझ पाता है,

    खूबसूरत है हर वो दिल

    जो किसी के मन की बात समझ पाता है,

    24
  • वाकिफ़ नही हुआ अभी तक तेरे असल अंदाज़ से ए ज़िंदगी

    वाकिफ़ नही हुआ अभी तक

    तेरे असल अंदाज़ से ए ज़िंदगी,

    25
  • यकीं रख खुदा पर/ या खुद पर बात एक ही है

    यकीं रख खुदा पर/ या खुद पर

    बात एक ही है

    26
  • ज़िदगी में किए करमो का ही अर्थ है

    ज़िदगी में किए करमो का ही अर्थ है

    जो आज की गुज़ारिश है

    वो कल व्यर्थ है.................

    27
  • ज़िंदगी को जैसे देखोगे वो वैसे ही दिख जाएगी,

    ज़िंदगी को जैसे देखोगे

    वो वैसे ही दिख जाएगी,

    28
  • मस्त रहते है हम ये नही पता कहाँ,

    मस्त रहते है हम

    ये नही पता कहाँ,

    29
  • अब रास्तों पर निकल कर मैं मंज़िल की तलाश करता हूँ...

    अब रास्तों पर निकल कर

    मैं मंज़िल की तलाश करता हूँ...

    30
  • कहीं ना कहीं तो तू है जब तक कदमों तले ज़मीं है

    कहीं ना कहीं तो तू है

    जब तक कदमों तले ज़मीं है

    31
  • सितारों की दुनिया में उतरे हैं हम फिर भी बेजान कंकरो से करते है जंग..

    सितारों की दुनिया में उतरे हैं हम

    फिर भी बेजान कंकरो से करते है जंग..

    32
  • ना जाने क्यों संतोष नही मिल पा रहा था

    ना जाने क्यों

    संतोष नही मिल पा रहा था

    33
  • सवालों के दरमियाँ उनसे रिश्ते बन गए

    सवालों के दरमियाँ

    उनसे रिश्ते बन गए,

    34
  • कारवाँ नही चल रहा बस वक़्त चल रहा है

    कारवाँ नही चल रहा

    बस वक़्त चल रहा है

    35
  • बाज़ार सज़ा है पर एक बार दिल से सोच

    बाज़ार सज़ा है

    पर एक बार दिल से सोच

    36
  • आओ कुछ यादें ढूँढे पुरानी वो माँ के सुनहरे रंग की सारी

    आओ कुछ यादें ढूँढे पुरानी

    वो माँ के सुनहरे रंग की सारी

    37
  • कामीने है साले जब भी खाली होते हैं

    कामीने है साले

    जब भी खाली होते हैं

    38
  • दुआओं की कमी सी लग रही है देना यारों

    दुआओं की कमी सी लग रही है

    देना यारों

    39
  • प्रकृति की रूह उदास है हर साँस मे प्रदूषण का वास है........

    प्रकृति की रूह उदास है

    हर साँस मे प्रदूषण का वास है........

    40
  • दुआओं में किसी अपने की घेहरा असर है जान नही मुझमें

    दुआओं में किसी अपने की घेहरा असर है

    जान नही मुझमें

    41
  • हर साल उस रावन को क्या मारते हो जो मर कर आज भी ज़िंदा है

    हर साल उस रावन को क्या मारते हो

    जो मर कर आज भी ज़िंदा है

    42
  • हर साँस मे मन के शब्दों को उतार मैं खुद को पूर्ण पाता हूँ

    हर साँस मे मन के शब्दों को उतार मैं खुद को पूर्ण पाता हूँ

    43
  • नवरत्रों में पूजा भले ही ना करें

    नवरत्रों में पूजा भले ही ना करें

    पर करें हर साँस मे नारी का सम्मान,

    44
  • अब समझ आया जंग और लड़ाई में फ़र्क क्या होता है

    अब समझ आया जंग और लड़ाई में फ़र्क क्या होता है

    जंग खुद से होती है 

    45
  • किस भीड़ का आज हिस्सा हूँ

    किस भीड़ का आज हिस्सा हूँ

    मुझे एहसास नही


    46
  • उड़ने वाली मैं आँधी नही थम जाए जो मैं वो लम्हा नही

    उड़ने वाली मैं आँधी नही

    थम जाए जो मैं वो लम्हा नही

    47
  • सवाल उठाते लोग जो पहले नही सोचा वो अब क्यों

    सवाल उठाते लोग

    जो पहले नही सोचा वो अब क्यों


    48
  • भीतर छुपे आनंद की संसार में खोज है

    भीतर छुपे आनंद की

    संसार में खोज है

    49
  • कंधे तो बहुत मिले राहों में हमने सोचा

    कंधे तो बहुत मिले राहों में

    हमने सोचा

    50
  • एक समारोह के समान बन गई है ज़िंदगी लोग आते हैं

    एक समारोह के समान बन गई है ज़िंदगी

    लोग आते हैं

    51
  • कहावत थी पुरानी आज मान गए

    कहावत थी पुरानी

    आज मान गए

    52
  • पत्थरों से बात की तो उनके मॅन की बात समझ आई थी

    पत्थरों से बात की

    तो उनके मॅन की बात समझ आई थी

    53
  • युहीन नही होंठों पर तेरा नाम लेने से तर जाता हूँ

    युहीन नही होंठों पर

    तेरा नाम लेने से तर जाता हूँ

    54
  • देश विदेश घूम आया सारे वेश पहन आया

    देश विदेश घूम आया

    सारे वेश पहन आया

    55
  • दर्द की दवा केवल वक़्त के पास है

    दर्द की दवा केवल वक़्त के पास है

    और वक़्त अब हमारे पास है नही

    56
  • सुख की चाह थी सुकून की राह थी

    सुख की चाह थी

    सुकून की राह थी

    57
  • हमने लाबो से गुज़ारिश की थी खामोश रहना

    हमने लाबो से गुज़ारिश की थी

    खामोश रहना

    आँखों से कहना भूल गए

    तुम बारिश ना करना .....

    58
  • इंसानियत का आकाल इस तरह बढ़ता जा रहा है

    इंसानियत का आकाल

    इस तरह बढ़ता जा रहा है ,

    59
  • जो कल था वो आज नही जो आज है वो कल नही

    जो कल था

    वो आज नही

     जो आज है

    वो कल नही

    60
  • बस दो पल ही तो माँग रही थी दुख कम करने का सहारा तुझसे बाँध रही थी

    बस दो पल ही तो माँग रही थी

    दुख कम करने का सहारा तुझसे बाँध रही थी

    61
  • दर्द से पूछा हमने तू लोगो को तकलीफ़ देता है

    दर्द से पूछा हमने

    तू लोगो को तकलीफ़ देता है

    62
  • खामोशियाँ भी गवाही देती है ध्यान से सुन मुखबिर

    खामोशियाँ भी गवाही देती है

    ध्यान से सुन मुखबिर


    63
  • अब तो मान जाओ सच्चाई से आँखें मत चुराओ

    अब तो मान जाओ

    सच्चाई से आँखें मत चुराओ

    64
  • हम महकाने निकले थे उन गलियों को

    हम महकाने निकले थे

    उन गलियों को

    65
  • ज़िंदगी के पहलुओं से वो कब तक वाकिफ़ करेगा

    ज़िंदगी के पहलुओं से

    वो कब तक वाकिफ़ करेगा

    ....

    66
  • कहीं आँखों का काजल लुभता रहा

    कहीं आँखों का काजल

    लुभता रहा

    67
  • तन्हाइयों का भंवर आज घेर रहा है

    तन्हाइयों का भंवर

    आज घेर रहा है

    68
  • तकलीफ़ों का भी क्या मस्त हिसाब है

    तकलीफ़ों का भी क्या मस्त हिसाब है

     आती हैं

    69
  • थकने लगा हूँ अब इस भाग गम भाग की ज़िंदगी से

    थकने लगा हूँ अब

    इस भाग गम भाग की ज़िंदगी से

    70
  • यूँ थक मत मुसाफिर ज़िंदगी से

    यूँ थक मत मुसाफिर

    ज़िंदगी से

    71
  • अब पता चला मौसम पर भी वक़्त का ही नूर था

    अब पता चला

    मौसम पर भी वक़्त का ही नूर था

    72
  • ज़िंदगी सब जी रहें हैं पर ज़िंदा कौन है ?

    ज़िंदगी सब जी रहें हैं

    पर ज़िंदा कौन है ?

    73
  • ग़लत समझ बैठे थे कुछ अपने हमें

    ग़लत समझ बैठे थे

    कुछ अपने हमें 

    74
  • खुवाब सीए नही जाते खुवाब जीए जातें हैं

    खुवाब सीए नही जाते

    खुवाब जीए जातें हैं

    75
  • आपका प्रोत्साहन हममें विश्वास भरता है

    आपका प्रोत्साहन

    हममें विश्वास भरता है

    76
  • मंज़िल मिल जाएगी या खुद मंज़िल बन जाओगे

    मंज़िल मिल जाएगी

    या खुद मंज़िल बन जाओगे

    77
  • कहते हैं किस्मत के लिखे को कोई बदल नही सकता

    कहते हैं

    किस्मत के लिखे को कोई बदल नही सकता

    78
  • मुस्कुराते रहने का हुनरहम पर यूँ भारी पड़ा

    मुस्कुराते रहने का हुनरहम पर यूँ भारी पड़ा

    कि जब गम बताना चाहातो लोगो ने मज़ाक में दिया उड़ा

    79
  • होठों पर शरारत आँखों में अदाएं

    होठों पर शरारत

    आँखों में अदाएं

    80
  • रूठो मगर इतना नहीं कि अपने मनाना छोड़ दें

    रूठो मगर इतना नहीं

    कि अपने मनाना छोड़ दें 

    81
  • प्लास्टिक का करें त्याग , उगाएं पेड़

    प्लास्टिक का करें त्याग

    उगाएं पेड़

    82
  • यूँ घबराते घबराते ...... थक गया

    यूँ घबराते घबराते ...... थक गया

    कल क्या होगा इस सोच में उलझ कर

    83
  • जब तक खामोश बैठा हूँ

    जब तक खामोश बैठा हूँ

    किसी को कुछ नहीं कहता हूँ

    84
  • कहते हैं कश्ती डूबी वहाँ

    कहते हैं

    कश्ती डूबी वहाँ

    85
  • मैने वक़्त से करवटें बदलना सीख लिया तक गया था

    मैने वक़्त से करवटें बदलना सीख लिया

    तक गया था

    हवा के रुख़ के हिसाब से चलते चलते................

    86
  • आनंद की खोज कर रहा हर मनुष्य

    आनंद की खोज

    कर रहा हर मनुष्य

    87
  • मेरी बेरूख़ी तुझे मज़बूत बना रही है

    मेरी बेरूख़ी तुझे मज़बूत बना रही है

    ध्यान से देख


    88
  • तुम्हारी खामोशी भारी मुस्कुराहट बहुत कुछ कह जाती है.

    तुम्हारी खामोशी भारी मुस्कुराहट

    बहुत कुछ कह जाती है.....

    89
  • सज़दे में माँ के हम सिर झुकाते हैं

    सज़दे में माँ के हम

    सिर झुकाते हैं

    90
  • यूँ ही नही हम खुवाबों से मिल पाते हैं दोस्तों

    यूँ ही नही हम खुवाबों से मिल पाते हैं दोस्तों

    ये आपका प्यार ही है जो हम

    91
  • वो नज़ारे हवाओं के थे

    वो नज़ारे हवाओं के थे

    जिनके रुख़ के चलते खुद ब खुद

    92
  • कुछ दोस्तयूँ रखते हैं मुझे संभाल कर

    कुछ दोस्तयूँ रखते हैं मुझे संभाल कर

    कि क्या कहूं , खरा उतर जाता हूँ


    93
  • ज़िंदगी को जेसे देखो गे

    ज़िंदगी को जेसे देखो गे

    वेसी ही दिख जाएगी,

    94
  • सफ़र में अपना कोई मिल जाना चाहिए

    सफ़र में अपना कोई मिल जाना चाहिए

    मन की गुफ्तगू को गुनगुनाने का बहाना चाहिए

    95
  • एक खूबसूरत वक़्त का हिस्सा हैं हम

    एक खूबसूरत वक़्त का हिस्सा हैं हम

    दूर होने का तू ना कर गम,

    96
  • कहाँ गई वो खुश्बू जो हर पल में घुली थी

    कहाँ गई वो खुश्बू

    जो हर पल में घुली थी

    अपनो से मिली थी ,

    हर लम्हें को मुस्कान का जाम समझ जीते थे

    97
  • वक़्त की तालीम भरी है शिक्षा से

    वक़्त की तालीम भरी है शिक्षा से 
    पर हम जीना चाहते हैं भिक्षा से

    98
  • रिश्तों को किसी की नज़र लगी है

    रिश्तों को किसी की नज़र लगी है

    इस बेबुनियादी सोच पर यकीं कर हमारी सोच पर बरफ जमी है

    पिगल कर बह जाए

    तो हमें हमारी खामियाँ नज़र आ जाए

    99
  • जाने ज़िंदगी किस भीड़ में खो गई

    जाने ज़िंदगी किस भीड़ में खो गई 

    एक वक़्त था जब अपनी थी 

    आज चिंताओं की हो गई ,

    जो पल बेफ़िक्र जीते थे 

    100
  • कभी मैं तुमसे अनुरोध करता हूँ

    कभी मैं तुमसे अनुरोध करता हूँ

    कभी मैं तुम्हारा विरोध करता हूँ,

    मैं अपने फ़र्ज़ से पीछे नही हटना चाहता हूँ

    मैं तुम्हे निरंतर देना चाहता हूँ,

    101
  • ज़िंदगी की ख़ासियत है

    ज़िंदगी की ख़ासियत है 
    जब तक माँ बाबा का साथ है 
    चाहे जीवन में कोई भी परिस्थिति आए
    दो शक्स हैं धरती पर जिनका सदेव सिर पर हाथ है

    102
  • एक दिन गुस्से में मैं , माँ से यूही कह गया

    एक दिन गुस्से में मैं माँ से यूही कह गया

    कि तू मुझे समझती नही ,

    माँ चुप खड़ी मेरी सारी बात सुनती रही

    माँ से जवाब ना मिलने पर

    103
  • कभी उलझी भी है कभी सुलझी भी है

    कभी उलझी भी है

    कभी सुलझी भी है

    कभी मेरे हाथ में तुलसी भी है

    पर गुज़रते हालत में कई बार मैं खुद को संभाल नही पाता हूँ

    104
  • ताक़त को मेरी तुम क्यों

    ताक़त को मेरी तुम क्यों

    आज़माना चाहते हो,

    कह तो रहा हूँ मैं कमज़ोर नही

    बस तू मेरी कमज़ोरी हो...........

    105
  • आँखें हर पल भीगी थी

    आँखें हर पल भीगी थी

    कैसी वक़्त की उलझनहै

    लाल रंग से बनी दुल्हन है ,

    ठिकाना मिल रहा है

    106
  • कविताओं के रास्ते हमनेजीवन खिलाया है

    कविताओं के रास्ते हमनेजीवन खिलाया है

    जो कह नही पाते थेवो लिख कर बताया है ,

    इशारा था जिनकी ओरउन्होने पढ़ कर भी नज़र अंदाज़ सा ताल्लुफ जताया है

    और जो दिल से हमें चाहते थे अपना मानते थे

    107
  • मैं बन कबीरा उठना चाहता हूँ जग क बीड़ा

    मैं बन कबीरा

    उठना चाहता हूँ जग क बीड़ा

    कहाँ से शुरू करूँ

    कोई बतलादे बन गुरु ,

    108
  • दीपावली की बधाई हो

    दीपावली की बधाई हो

     प्रेम संग दिलों की सगाई हो

    दुवेश भावना की घर से विदाई हो

    अपने घर के साथ साथ रोशनी किसी ज़रूरत मंद के घर लगाई हो ..........................

    109
  • दीप दीपावली के हम जलाएँ

    दीप दीपावली के हम जलाएँ

    वहाँ सरहदों पर जवान वतन पर कुर्बान हो जाएँ

    यहाँ आँखों मे हम त्योहार की रौनक सजाएँ

    वहाँ वीरों के परिवार वालों की आँखें भर आएँ ,

    110
  • खुद को अभी इस काबिल नही समझते

    खुद को अभी इस काबिल नही समझते

    कि किसी और की ग़लती सुधार सके

    बस इस काबिल समझना चाहते हैं खुद को

    कि कारण कोई भी हो बस 


    111
  • सुहागन का सजे सुहाग सिंदूर की राखे साजन लाज ,

    सुहागन का सजे सुहाग

    सिंदूर की राखे साजन लाज ,

    माँ के आँचल तले

    दुनिया बेटियों की पले ,

    112
  • हम तुम्हारे बिना जी नही सकते

    हम तुम्हारे बिना जी नही सकते

    और तुमसे ही रूठे बैठे हैं

    हमें नही दिखता कोई रास्ता

    हम ऐसे क्यों रहते हैं ,

    113
  • हसीन लगती थी मैं सबको जब तक कसिन थी जब से नज़ाकत छोड़ी है

    हसीन लगती थी मैं सबको जब तक कसिन थी जब से नज़ाकत छोड़ी है

    लोगो के नज़रिए ने नज़रे मोडी हैं

    कुछ ना करती थी तो ठीक था

    अब कुछ भी करलूँ तो

    114
  • काश हमने हर सुबह भीतर बैठे रावण को मार कर जगाई होती

    काश हमने हर सुबह

    भीतर बैठे रावण को मार कर जगाई होती ,

    किसी का दिल दुखाने  से पहले

    खुद की पलक भर आई होती

    115
  • बादशाह कहते थे लोग हमें

    बादशाह कहते थे लोग हमें

    जब तक हम ना समझ थे

    जब जब सीख कर आगे बढ़े

    वही लोग नसीहत देने को


    116
  • रिश्तों की मिठास हमारी ताक़त होती है

    रिश्तों की मिठास 

    हमारी ताक़त होती है 

    जिसका हमें एहसास नही होता 

    पर जब जन्म लेती है ,  उन रिश्तों मे खटास ,

    117
  • हे प्रभु मैं कहीं भी कैसी भी हूँ,

    हे  प्रभु

    मैं कहीं भी

    कैसी भी हूँ,

    खुश हूँ अगर बिटिया हूँ

    118
  • बादलों की गड़गड़ाहट कह रही है

    बादलों की गड़गड़ाहट कह रही है

    अब वो सुकून नही

    बरसा करते थे हम अपनी धुन में

    अब वो जुनून नही ,

    119
  • ज़िंदगी से शिकायते नही रखी हमने

    ज़िंदगी से शिकायते नही रखी हमने

    सोचा जो मिला वो भला   ,

    पर इसका मतलब ये नही

    कि हमें गम ही ना मिला ,

    120
  • सपने खुवाबों में तुम रखते हो हमसे वास्ता

    सपने

    खुवाबों में तुम रखते हो हमसे वास्ता

    हर उम्मीद का गुज़रता है तुमसे रास्ता ,

    खो जाते हो तुम , भोर होने पर

    ढूंढता रहता हूँ तुम्हे हर डगर ,

    क्या वास्तविकता से तुम्हारा नाता नही

    या

    होश में बैठा मानव तुमको भाता नही .............

    121
  • एक अजीब सा रिश्ता बनता जा रहा है

    एक अजीब सा रिश्ता बनता जा रहा है

    उन चेहरों के साथ ,

    जिनके पीछे छिपे होते हैं गहरे राज़ ,

    या यूँ कह लो की ज़िंदगी की गहराई का अनुभव मिलता है ,

    122
  • गुज़रते वक़्त के साथ हम कितना भी दौड़ लें

    गुज़रते वक़्त के साथ

    हम कितना भी दौड़ लें

    कुछ दिल से जुड़े लोगों की

    हसीन यादें हमारा साथ कभी नही छोड़ती ,


    123
  • हर आँख नाम नही

    हर आँख नाम नही

    शायद इसलिए सबको गम नही,

    उस घर के खिलोनो से आती है आवाज़

    कब बँध होगा

    124
  • मुद्दत हुई बात करे कुछ गुज़रे

    मुद्दत हुई बात करे कुछ गुज़रे

    अफ़सानो की

    जी रहे हैं जाने किस धुन में ज़माने की,

    पियास है

    125
  • गुरु एक सागर है

    गुरु एक सागर है

    जिसमें डुबकी लगा

    व्यवहार जीवन अपना

    सीख लें,

    126
  • रूह की उदासी मन की पीड़ा

    रूह की उदासी

    मन की पीड़ा

    कह रही है

    हे जगत के स्वामी

    127
  • क्यों हर पल हमें अपने आप से लड़ना पड़ता है

    क्यों हर पल हमें

    अपने आप से लड़ना पड़ता है

    जिसे मन ना स्वीकारे

    मजबूरन उसके साथ भी आगे

    128
  • मन की खुशी का ठिकाना नही पिता से बड़ा आशियाना नही,

    मन की खुशी का ठिकाना नही

    पिता से बड़ा आशियाना नही,

    चाहे मिल जाए जहाँ

    माँ की कमी

    129
  • हारियाला सावन हरियाली तीज

    हारियाला सावन

    हरियाली तीज

    दिलों में बोएँ

    खुशियों के बीज

    130
  • एक पैगाम देश वासियों के नाम

    एक पैगाम

    देश वासियों के नाम

    जब हम तिरंगा ओढ़ गहरी नींद सो जाते है

    हज़ारों दिए जलाए जाते है

    131
  • एक ज़माना था जब इच्छा कर पर भटक मत

    एक ज़माना था जब

    इच्छा कर पर भटक मत 

    जो मिल जाए वो राह पकड़ अटक मत,


    मैं तो तेरे ही भीतर रहती हूँ

    132
  • हर दिन में कई दिन जी लूँ

    हर दिन में कई दिन जी लूँ

    हर लम्हें को सी लूँ ,

    होश में ना औउँ कभी

    तुम्हारी एक झलक से

    133
  • हम जिन गलियों में पलें हैं

    हम जिन गलियों में

    पलें हैं

    वो कहते हैं

    वहाँ ख़ुदग़र्ज़ लोग रहते है ,

    134
  • वो कहते है हमसे

    वो कहते है हमसे

    तुमने जो भी किया

    ग़लत ही किया ,

    हमने उनकी और नज़रे घुमाई

    135
  • आस्था में विश्वास रखा

    आस्था में विश्वास रखा
    कभी विश्वास में रखी आस्था,
    गाड़ी चलती चली गई
    क्योंकि

    136
  • पिता वो सवेरा है

    पिता वो सवेरा है

    जिनके साथ सब कुछ मेरा है 

    पिता वो शाम है

    जहाँ सब कुछ मेरे नाम है

    137
  • राहों में ज़िंदगी के जिस पल से

    राहों में ज़िंदगी के

    जिस पल से 

    तुम्हें हमसफ़र बना लिया

     कदम ये ज़िंदगी में

    138
  • भारत पर अभिमान करो उँचा उसका नाम करो,

    भारत पर अभिमान करो

    उँचा उसका नाम करो,

    फक्र  से  सीना  तान  कर कह सको भारतीए हो

    तुम ऐसा  कुछ  काम  करो ,

    139
  • याद नही वो दिन कब माँ को गले लगा कर कहा

    याद नही वो दिन
    कब माँ को गले लगा कर कहा 
    माँ तू ही है मेरा जहाँ ,

    माँ आज भी यही कहती है

    140
  • खुशी की तलाश में

    खुशी की तलाश में
    घूमा गली गली
    एक दिन थक कर बैठ गया
    सवाल के जवाब में ऐंठ गया,

    141
  • ज़िंदगी जी रहे हैं

    ज़िंदगी जी रहे हैं 

    फिर भी जीने की खुवाहिश करते हैं 

    समझ नही आता 

    लोग किस उलझन में रहते हैं 

    142
  • आँखों में आँसू नही मगर दिल में उदासी है

    आँखों में आँसू नही

    मगर दिल में उदासी है

    नज़ाने खुशी किस घड़ी की पियासी है ,

    हर वक़्त सोच.... अजीब- अजीब से ख्यालों से मुलाकात करवाती है


    143
  • चाँद पैसों से बाज़ार में समान बिकता था

    चाँद पैसों से बाज़ार में समान बिकता था

    आज चाँद पैसों में केवल इंसानियत बिकती है

    समान नहीं

    144
  • गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर

    गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर

    हर उस शक्स को प्रणाम

    जीने किसी भी रूप में दिया हो

    हमे शिक्षा का ज्ञान ,

    145
  • व्याकुल मन मुरझाया सा तन

    व्याकुल मन

    मुरझाया सा तन

    सुना रहा है दास्तान

    किस भीड़ में खो रहा है इंसान ,

    146
  • ज़िंदगी की खूबसूरती पर तभ तक धूल जमी थी

    ज़िंदगी की खूबसूरती पर तभ तक धूल जमी थी

    जब तक उसको देखने के नज़रिए में हमारे कमी थी ............

    147
  • मन डरा - डरा सा घूमे फिरा- फिरा सा,

    मन डरा - डरा सा

    घूमे फिरा- फिरा सा,

     जिसे पकड़ना चाहता है

    वो और भी दूर भाग जाता है,

    148
  • फूलों के देख मुस्कुराते हो

    फूलों के देख मुस्कुराते हो

    मौसम के रंगों के साथ खिल जाते हो,

     हरियाली की उपज से 

    भोजन का लुफ्त उठाते हो,

    149
  • फ़ासले मिटाना चाहते हो अगर

    फ़ासले मिटाना चाहते हो अगर

    तो अपना लो रास्ता हैं आसान,

    जिसे अपना लिया उससे कर लो

    महोब्बत..........

    150
  • मौसम का भी अपना एक अलग ही है जादू

    मौसम का भी अपना
    एक अलग ही है जादू,
    मन की चंचलता को 
    कर देता बेकाबू,

    151
  • महोब्बत नशा तेरा इस कदर चॅड गया

    महोब्बत

     नशा तेरा इस कदर चॅड गया

    गुलाब की खुश्बू

    और रंग ,

    152
  • ग़लत फैमियों का असर इतना गहरा पड़ा

    ग़लत फैमियों का असर इतना गहरा पड़ा

    आज सूरज को भी देखती हूँ तो लगता है

    ये भी किसी…… स्वार्थ के कारण है खड़ा...................

    153
  • ज़माने के हिसाब से चलते रहें ये सोच कर

    ज़माने के हिसाब से चलते रहें

    ये सोच कर

    कि एक ना एक दिन हम ज़माने को जीत लेंगें,

     ज़माना हमसे भी होशियार निकला

    154
  • तेरी आँखों में आज बग़ावत देख

    तेरी आँखों में आज बग़ावत देख
    एहसास हुआ तेरे दर्द का

    हम सोचते थे 
    वक़्त की दावा ही काफ़ी है तेरे हर मर्ज़ का

    155
  • जिसे मैं ढूँढती रही

    जिसे मैं ढूँढती रही

    दर बदर

    वो मुझे मिला

    मेरे ही घर,

    156
  • एक सवाल आज नही तो कल

    एक सवाल

    आज नही तो कल

    मन में आ ही जाता है

     आख़िर लड़की होना

    गुनाह क्यों बन जाता है................

    157
  • मन क्यूँ रुआंसा है

    मन क्यूँ रुआंसा है

    हर ओर लगता धुआंसा है

    फूल खिल रहें हैं

    पर मेरा दम घुट रहा है

    158
  • मुक्कम्मल जहाँ की खुवाहिश रखतें हैं

    मुक्कम्मल जहाँ की खुवाहिश रखतें हैं 

    हम सोचते हैं की हम बहुत सस्ते हैं............ 

    159
  • मैं फिर भी ज़िंदा हूँ

    मैं फिर भी ज़िंदा हूँ

     मौत से मिलकर किसी को मार देना, फिर भी आसान है

    जीतेजी किसी के ज़मीर को मार कर, उसे ज़िंदा रहने पर मजबूर कर देना

     क्या कहूँ ....... मैं......क्या कहूँ

    160
  • मैं तुझे इतना चाहूँ कि देख आसमाँ झुक जाए

    मैं तुझे इतना चाहूँ

    कि देख आसमाँ झुक जाए

    तुझे मेरे सिवा कोई ना देख सके

    तू मेरे प्यार में इस कदर डूब जाए ,

    161
  • सैनिक की रूह से आज हुई मुलाकात

    सैनिक की रूह से आज हुई मुलाकात

    अमर होने के बाद भी क्या खूब रखते हैं वो जज़्बात ,

    कहते है ना जला तू मेरी याद में एक भी मोमबत्ती

    हमे नही चाहिए ये हमदर्दी,

    162
  • उनको अपना बनाने की चाह मैं

    उनको अपना बनाने की चाह मैं

    जिस दिन खुद को बदला,

    उनकी चाहते बदल गई......................

     हमने सपने देखे थे .........उनके साथ उगते सूरज के,

    163
  • दिन बीत जाते हैं वक़्त भी गुज़र जाता है

    दिन बीत जाते हैं

    वक़्त भी गुज़र जाता है

    गर साथ हों कुछ दोस्त

    सुकून नज़र आता है,

    164
  • काँटा माली से कहता है

    काँटा माली से कहता है

    आप जिस गुलाब की हर वक़्त तारीफ करते हो.........

    माना हम वो गुलाब नही ............

    मगर हम इतने भी खराब नही

    165
  • कहाँ चले गए वो दिन

    कहाँ चले गए वो दिन

    जब हम जी नही पाते थे एक दूसरे के बिन

    संग तुम्हारे वक़्त बिताने को

    मैं सबसे लड़ लेती थी,

    166
  • खुशी ने गम से कहा तू पैदा ही क्यों होता है

    खुशी ने गम से कहा

    तू पैदा ही क्यों होता है

    जबकि तेरे साथ होने से

    इंसान केवल रोता है,

    167
  • खूबसूरत लम्हों को जब जब साथ ले

    खूबसूरत लम्हों को

    जब जब साथ ले

    रास्तों से गुज़रा.....

    पथरो से बातें करना सीख गया

    168
  • ज़िंदगी खुश हूँ ज़िंदगी से

    ज़िंदगी

    खुश हूँ ज़िंदगी से

    कभी खफा हूँ,

    कभी करीब हूँ

    169
  • रुक जाए जो वो सैलाब नही घर बैठे जो सपने देखें

    रुक जाए जो

    वो सैलाब नही

    घर बैठे जो सपने देखें

    वो खुवाब नही,

    170
  • आँसुओं को आज भीगने का मन है

    आँसुओं को आज भीगने का मन है

    बारिश की बूँदों के साथ खिलने का मान है

    रूह कह रही है

    आज मुझे भी एकेला छोड़ दो

    171
  • रुक जाए जो वो सैलाब नही

    रुक जाए जो

    वो सैलाब नही

    घर बैठे जो सपने देखें

    वो खुवाब नही,

    172
  • आँसुओं को आज भीगने का मन है

    आँसुओं को आज भीगने का मन है

    बारिश की बूँदों के साथ खिलने का मान है

    रूह कह रही है

    आज मुझे भी एकेला छोड़ दो

    173
  • गर रूठो तो मानना भी सीखो

    गर रूठो तो मानना भी सीखो
    क्योंकि रूठे को मानाने में 
    मज़ा तभी आता है
    जब वो हमारी शक्ति के भीतर 

    174
  • वक़्त से नाराज़ हो चला हवाओं से कहा तुमने मुझे छला

    वक़्त से नाराज़ हो चला

    हवाओं से कहा तुमने मुझे छला,

    बहक गया था मैं

    खुद की लगाई हुई आग में जल रहा था मैं,

    175
  • आशिकी बढ़ती गई जैसे जैसे हमारी शायरी से

    आशिकी बढ़ती गई

    जैसे जैसे हमारी शायरी से

    दागा देने वाले दोस्त कम हो गए

    जो दिल से नहीदिखावे के लिए जुड़े थे

    176
  • झुकना मुनसिफ़ समझा हमने क्योंकि रिश्तों का पल्ला भारी निकाला,

    झुकना मुनसिफ़ समझा हमने

    क्योंकि रिश्तों का पल्ला भारी निकाला,

    हमने सोचा हम एकेले जी लेंगें

    पर इस सोच में घरहमारा खाली निकला

    177
  • शहीदी दिवस के अवसर पर

    शहीदी दिवस के अवसर पर

    शहीदों के मन की बात कहना चाहूँगी .........

    सरहदों से इश्क कर बैठे हैं

    इसलिए हम वही पर रहते हैं,

    178
  • वक़्त ने एक बार फिर

    वक़्त ने एक बार फिर

    तुम्हें मेरी मंज़िल का किनारा बनाया है

    अब तो मुझे क़ुबूल कर लेना

    पहले तो तुमने मुझे ठुकरायाहै,

    179
  • बेवजह की नाराज़गियों से दिल

    बेवजह की नाराज़गियों से दिल

    कुछ इस कदर टूटा है

    लगता है अब हर रिश्ता जूठा है,

    वो सब जो प्रेम ने बोया था

    180
  • तुझे देखते रहना मेरे लिए ज़रूरी नही

    तुझे देखते रहना मेरे लिए ज़रूरी नही
    तेरे दिल मैं जगह बनी रहे 
    है ज़रूरी,
    तू रोज़ एक बार दिल से याद करले

    181
  • आज कह दिया जमाने से ना पूछो की मैं क्या चाहती हूँ,

    आज कह दिया जमाने से

    ना पूछो की मैं क्या चाहती हूँ,

    ये लड़ाई मेरी खुद की है

    अब मुझे सहारा मत दो,

    182
  • होली का उत्सव हो गुंजिया के साथ गपशप हो

    होली का उत्सव हो

    गुंजिया के साथ गपशप हो

    रंगों से घुली  ज़िंदगी हो,

    आप सब को मिली हो

    183
  • ईमानदारी के अंदर छुपा मिलता है समुंदर

    ईमानदारी के अंदर 

    छुपा मिलता है समुंदर ,

    शायद इसलिए ही कमज़ोर लोग

    बेईमानी का रास्ता अपना लेते हैं

    184
  • दो पंक्तियों में बस यही कहना चाहूँगी

    दो पंक्तियों में

    बस यही कहना चाहूँगी

    जब भी ,जहाँ भीजन्म मिले

    सदैव औरत ही बनना चाहूँगी

    185
  • महकती है खुशबू उनके पैमाने से

    महकती  है खुशबू उनके पैमाने से

    वो मुस्कुराते हैं हम पर

    जब गुज़रते हैं हम उनके शामयने से,

    गौर तो वो फ़ार्मा ते हैं हम पर

    186
  • कसम है मुझे ए वक़्त अब तुझ पर भरोसा रख कर

    कसम है मुझे ए वक़्त

    अब तुझ पर भरोसा रख कर

     नही बैठूँगा

    तुझे दोस्त समझ सोचता था

    187
  • अनजाने कभी कभी कुछ इस तरह टकराते हैं

    अनजाने कभी कभी

    कुछ इस तरह टकराते हैं

    मुलाक़ातें कभी हुई नहीं

    शामें साथ गुज़री हों

    188
  • ज़माना सोचता है अब ठहर जाएगी ज़िंदगी हमारी

    ज़माना सोचता है

    अब ठहर जाएगी ज़िंदगी हमारी

    क्योंकि उन्होने हमारे दरवाज़े पर ताला लगा दिया

    पर वो नादान

    189
  • तुम्हारी शिकायतों की चिट्ठी पढ़ कर

    तुम्हारी शिकायतों की चिट्ठी पढ़ कर

    ऐसा लगता है

    कुछ पल और ऐसे ही जी लें

    क्योंकि खुद को इसके हिसाब से चलाने के बाद

    190
  • आज फिर दिल बहुत उदास है

    आज फिर दिल बहुत उदास है

    उन रिश्तों के धागे उलझ गए हैं

    जो दिल के बहुत पास हैं,

    माना के कभी कभी अच्छी होती हैं दूरियाँ

    191
  • अजीब अजीब से पहलुओं से कई बार

    अजीब अजीब से पहलुओं से कई बार
    कुछ इस तरह सामना हो जाता है
    चलते चलते रास्तों पर 
    होसला डगमगा जाता है,

    192
  • ये नज़र लगना क्या होता है ?

    ये नज़र लगना क्या होता है ?

    इस शब्द को तलवार बना

    आदमी क्या क्या बोता है,

    और खुल के मुस्कुराने वाले पलों को खोता है

    193
  • गर रूठो तो मानना भी सीखो

    गर रूठो तो मानना भी सीखो
    क्योंकि रूठे को मानाने में 
    मज़ा तभी आता है
    जब वो हमारी शक्ति के भीतर 

    194
  • वक़्त से नाराज़ हो चला

    वक़्त से नाराज़ हो चला

    हवाओं से कहा तुमने मुझे छला,

    बहक गया था मैं

    खुद की लगाई हुई आग में जल रहा था मैं,

    195
  • आशिकी बढ़ती गई

    आशिकी बढ़ती गई

    जैसे जैसे हमारी शायरी से

    दागा देने वाले दोस्त कम हो गए

    जो दिल से नहीदिखावे के लिए जुड़े थे

    196
  • झुकना मुनसिफ़ समझा हमने

    झुकना मुनसिफ़ समझा हमने

    क्योंकि रिश्तों का पल्ला भारी निकाला,

    हमने सोचा हम एकेले जी लेंगें

    पर इस सोच में घरहमारा खाली निकला,

    197
  • शहीदी दिवस के अवसर पर शहीदों के मन की बात कहना चाहूँगी

    शहीदी दिवस के अवसर पर

    शहीदों के मन की बात कहना चाहूँगी .........

    सरहदों से इश्क कर बैठे हैं

    इसलिए हम वही पर रहते हैं,

    198
  • वक़्त ने एक बार फिर

    वक़्त ने एक बार फिर

    तुम्हें मेरी मंज़िल का किनारा बनाया है

    अब तो मुझे क़ुबूल कर लेना

    पहले तो तुमने मुझे ठुकराया है,

    199
  • बेवजह की नाराज़गियों से दिल

    बेवजह की नाराज़गियों से दिल

    कुछ इस कदर टूटा है

    लगता है अब हर रिश्ता जूठा है,

    वो सब जो प्रेम ने बोया था

    200
  • तुझे देखते रहना मेरे लिए ज़रूरी नही

    तुझे देखते रहना मेरे लिए ज़रूरी नही
    तेरे दिल मैं जगह बनी रहे 
    है ज़रूरी,
    तू रोज़ एक बार दिल से याद करले

    201
  • आज कह दिया जमाने से

    आज कह दिया जमाने से

    ना पूछो की मैं क्या चाहती हूँ,

    ये लड़ाई मेरी खुद की है

    अब मुझे सहारा मत दो,

    202
  • होली का उत्सव हो

    होली का उत्सव हो

    गुंजिया के साथ गपशप हो

    रंगों से घुली  ज़िंदगी हो,

    आप सब को मिली हो

    203
  • ईमानदारी के अंदर छुपा मिलता है समुंदर

    ईमानदारी के अंदर 

    छुपा मिलता है समुंदर ,

    शायद इसलिए ही कमज़ोर लोग

    बेईमानी का रास्ता अपना लेते हैं

    204
  • दो पंक्तियों में बस यही कहना चाहूँगी

    दो पंक्तियों में

    बस यही कहना चाहूँगी

    जब भी ,जहाँ भीजन्म मिले

    सदैव औरत ही बनना चाहूँगी

    205
  • महकती है खुशबू उनके पैमाने से

    महकती  है खुशबू उनके पैमाने से

    वो मुस्कुराते हैं हम पर

    जब गुज़रते हैं हम उनके शामयने से,

    गौर तो वो फ़ार्मा ते हैं हम पर

    206
  • कसम है मुझे ए वक़्त

    कसम है मुझे ए वक़्त

    अब तुझ पर भरोसा रख कर

     नही बैठूँगा

    तुझे दोस्त समझ सोचता था

    207
  • अनजाने कभी कभी

    अनजाने कभी कभी

    कुछ इस तरह टकराते हैं

    मुलाक़ातें कभी हुई नहीं

    शामें साथ गुज़री हों


    208
  • ज़माना सोचता है

    ज़माना सोचता है

    अब ठहर जाएगी ज़िंदगी हमारी

    क्योंकि उन्होने हमारे दरवाज़े पर ताला लगा दिया

    पर वो नादान

    209
  • तुम्हारी शिकायतों की चिट्ठी पढ़ कर

    तुम्हारी शिकायतों की चिट्ठी पढ़ कर

    ऐसा लगता है

    कुछ पल और ऐसे ही जी लें

    क्योंकि खुद को इसके हिसाब से चलाने के बाद

    210
  • आज फिर दिल बहुत उदास है

    आज फिर दिल बहुत उदास है

    उन रिश्तों के धागे उलझ गए हैं

    जो दिल के बहुत पास हैं,

    माना के कभी कभी अच्छी होती हैं दूरियाँ

    211
  • अजीब अजीब से पहलुओं से कई बार

    अजीब अजीब से पहलुओं से कई बार
    कुछ इस तरह सामना हो जाता है
    चलते चलते रास्तों पर 
    होसला डगमगा जाता है,

    212
  • ये नज़र लगना क्या होता है ?

    ये नज़र लगना क्या होता है ?

    इस शब्द को तलवार बना

    आदमी क्या क्या बोता है,

    और खुल के मुस्कुराने वाले पलों को खोता है

    213
  • कदम ज़िंदगी में कभी रुकने नही चाहिए

    कदम ज़िंदगी में कभी रुकने नही चाहिए

    रुकना चाहिए गर ......... तो वो है

    ना उम्मीदि का ख़याल..................

     

    214
  • कैसे कहूँ मन की बात

    कैसे कहूँ मन की बात

    हालत रोक रहें है,

    आज आँखें ही पढ़ लेना दोस्तों,

    जज़्बातों से गुफ्तगू कभी और कर लेंगे,

    215
  • रूठ गई अगर ज़िंदगी

    रूठ गई अगर ज़िंदगी 

    उसे मनालो

    जो अब तक सो रहा है

    जतन कर उसे जगालो,

    216
  • माँ के आँचल से सिमट कर

    माँ के आँचल से सिमट कर

    आँख भरती हैं क्यों

    देख उसका चेहरा मेरी

    उदासी ढलती है क्यों 

    217
  • छू लेता है , तेरा दर्द मुझे

    छू लेता है तेरा दर्द मुझे

    बिन कहे तेरे

    ये मेरी चाहत है या दीवानगी

    मैं नहीं जानता,

    218
  • अपनी कमज़ोरिओं को ढाल मत बनाओ

    अपनी कमज़ोरिओं को ढाल मत बनाओ

    रास्ते पर पड़े कंकरो को सवाल मत बनाओ

    हर हाल में भड़ते चलते जाने को ही तो ज़िंदगी कहते हैं,

    इसलिए मिलने वाली .चुनौतीयों को बबाल मत बनाओ,

    219
  • मन भ्रमण

    मन भ्रमण

     

    बैठा बैठा पत्थर पर खरोचें मारता

    ज़माने का गुस्सा उस पर उतारता,

    खुद को आज बेबस महसूस करता हूँ

    220
  • उस वक़्त को करते सलाम

    उस वक़्त को करते सलाम

    जिसकी नस नस में बसा था सम्मान ,

    चाहे भिन थी जातियाँ

    पर सबका एक ही लक्श था

    221
  • परख में फरक

    परख में फरक

    कहीं एक चिराग से भी दिखता उजाला

    तो कहीं चिरागों का मेला..........

    पर वहाँ इंसान है काला.......

    222
  • जो अभी झुकी नही डाली

    जो अभी झुकी नही डाली

    मैं उसका हूँ माली

    मैं और कोई नही

    वही हूँ

    223
  • मेरी खामोशी खामोश हूँ

    मेरी खामोशी

    खामोश हूँ

    गुनेहगर नही

    मैं पियार कर सकता हूँ

    224
  • पियासा सागर अब पियासा है सागर

    पियासा सागर

    अब पियासा है सागर

    जाने कहाँ गया वो उजागर,

    जो मन को लुभाता था

    225
  • क्या खूब कहा था किसी ने

    क्या खूब कहा था किसी ने

    हसरते पूरी करने की खुवाहिश में ना उतरना मेरे दोस्त

    ये ज़िंदगी का मेला हसीन ज़रूर दिखता है

    पर यहाँ खुवाहिशे पूरी करने के नाम पर सुकून बिकता है,

    226
  • दीपावली भारत वासीओं का त्योहार है

    दीपावली भारत वासीओं का त्योहार है

    इसलिए

    देश में इस्तेमाल होने वाली हर चीज़ पर

    देश में बनी चीज़ो का ही अधिकार है

    227
  • दिल के किसी कोने में ये आरज़ू करते हैं

    दिल के किसी कोने में ये आरज़ू करते हैं

    माँ अब हम और बड़े होने से डरते हैं,

    केसे कहें तुझसे कि,

    जब छोटे थे तब बड़े होने की राह थी

    228
  • एक अजीब सा रिश्ता बनता जा रहा है

    एक अजीब सा रिश्ता बनता जा रहा है

    उन चेहरो के साथ

    जिनकी हसीं पीछे छिपे होते है गहरे राज़

    या यूँ कह लो

    229
  • निराशा में छुपी होती है अनगिनत आशाएं

    निराशा में छुपी होती है अनगिनत आशाएं

    शब्द में क्या रखा है

    जब अर्थ में छुपी है गहरी दुआएँ,

    गौर फ़ार्मा कर देखलो

    230
  • निकले थे ज़माने में कभी दोस्त बनाने

    निकले थे ज़माने में कभी दोस्त बनाने

    क्या क्या तज़ुर्बे मिले

    जो लिख बैठे कई फसाने,

    जो बाते अच्छी करता था

    231
  • पियारी माँ

    पियारी माँ

    तुम इतनी सहनशक्ति कहाँ से लाती हो

    माँ....

    तुम किस जहाँ से आती हो.................

    232
  • दूसरे से खुद की तुलना करखुद को ही कमज़ोर बताते है

    दूसरे से खुद की तुलना करखुद को ही कमज़ोर बताते है

    जैसे हैं

    जाने वैसे ही खुश क्यों नही रह पाते हैं…………………

    233
  • आपका साथ हमारे लिए आशीर्वाद है

    आपका साथ
    हमारे लिए आशीर्वाद है
    आपके हर कदम ने रचा एक नया इतिहास है,
    क्योंकि

    234
  • मौसम के रंगों के साथ

    मौसम के रंगों के साथ

    खेलने का तुम्हारे पास वक़्त नही,

    और बात बात पर इल्ज़ाम उस खुदा पर लगते हो

    जिसके तुम खुद सच्चे भक़्त भी नही........

    235
  • उलझनों में उलझी ज़िंदगी

    उलझनों में उलझी ज़िंदगी

    किस तरह लगती है

    में ढूंडू उत्तर में

    वो पच्छिम में मिलती है

    236
  • कुछ इस तरह मैं वक़्त से टकराया,,,,,

    कुछ इस तरह

    मैं वक़्त से टकराया,,,,,

    कि जिस पर मैने सब कुछ लूटाया था

    आज उस ही ने मुझे सरे बाज़ार गिराया,

    237
  • तुमने ये अचानक क्या कह दिया

    तुमने ये अचानक क्या कह दिया

    सुन कर मैं चकित रह गया,

    कोई जवाब नही था मेरे पास

    जाने वो घड़ी मैं कैसे सेह गया,

    238
  • तुम्हारी खामोशी को नज़र अंदाज़ कर

    तुम्हारी खामोशी को नज़र अंदाज़ कर

    सच हमसे गुनाह हो गया

    महोब्बत में एक आशिक हमसे फनाह हो गया,

    तुमने सोचा की हम क्यों इज़हार करें

    239
  • खामोशी की लेकर आड़

    खामोशी की लेकर आड़
    क्यों कर रहे हो..........रिश्तों के साथ खिलवाड़,
    कह दो जो कहना है
    खामोशी अब तुम्हारी तीर से चुभाती है

    240
  • केसे ब्यान केरूँ

    केसे ब्यान केरूँ

    कि तुझसे कितना पियार केरूँ,

    चाहत में तेरे ये दिल बेकरार

    तुझसे करने लगा हूँ में इतना पियार,

    241
  • सोचते हैं की हम इतना क्यूँ सोचते हैं

    सोचते हैं की हम इतना क्यूँ सोचते हैं

    हाथों में गड़ी लकीरों को क्यूँ ख़रोचते हैं,

    जो रिश्ते विरासत में मिलें हैं

    खुद उन्हे निभा नही पाते

    242
  • बेख़बर थे हम इस खबर से

    बेख़बर थे हम इस खबर से

    कि तुमने ये खबर फैलाई

    कि हो गई हमारी जुदाई,

    खुद ही आकर कह गए होते

    243
  • मेरे प्रभु मुझे पर कृपा करो

    मेरे प्रभु मुझे पर कृपा करो

    इस भक्त की ओर दया करो,

    तू मुझमें रहे में तुझमें रहूँ

    244
  • मुक्कदर से पूछ बैठते हैं हम

    मुक्कदर से पूछ बैठते हैं हम

    कि तू हमे इतने तज़ुर्बे क्यों देता है

    कभी धूप में जलने छोड़ देता है

    कभी खुद ही हमारे कदमों को ग़लत रास्तों सेमोड़ देता है

    245
  • कोटी कोटी उन देश भक्तो को नमन

    कोटी कोटी उन देश भक्तो को नमन

    जिनकी बदौलत

    देश में खिले चमन

    हर ओर छाए उजियारा

    246
  • सागर का उछलता पानी

    सागर का उछलता पानी

    तेरी याद दिलाता है,

    ये बदलता मौसम

    तेरी खुशबू महकती है


    247
  • एक था समुंदर एक परिंदा

    एक था समुंदर

    एक परिंदा

    एक था इंसान

    जो था ज़िंदा


    248
  • गुज़रते वक़्त में इतनी ताक़त होती है

    गुज़रते वक़्त में इतनी ताक़त होती है

    की वो हर ज़ख़्म को भर देता है,

    जो कभी कभी  दवा भी नही कर पाती



    249
  • यूँ सोचते है कि इस तरह थम जाने में भी कोई समझदारी होगी

    यूँ सोचते है कि

    इस तरह थम जाने में भी कोई समझदारी होगी

    मंज़िल तो फिर एक दिन हमारी होगी

    थोडा आराम फ़ार्मा लेते हैं


    250
  • आवाज़ दी तो पहचाना नहीं

    आवाज़ दी तो पहचाना नहीं

    हम चुप रहे तो इशारे करती हो

    फिर करीब आते तुम्हारे

    तो कटी कटी रहती

    दूर चले जाएँ तो साँसे भारती हो,

    इन अदाओं से मैं वाकिफ़ नहीं...

    पियार पहला और आख़िरी भी तुम्ही

    रास्ता अब तुम ही दिखा दो

    कैसे इस मूहोब्बत को मुकाम दें

    ज़रा मुझे सिखा दो…..

    251
  • शब्द शब्द सुना जाए हर कोई

    शब्द शब्द सुना जाए हर कोई

    बात की गहराई समझे ना कोई,

    दुखता है मन सुनने वाले का भी

    सुनाने वाले को बताए ये कोई.....

    252
  • उनका चेहरा पढ़ने की कोशिश कर रहा था

    उनका चेहरा पढ़ने की कोशिश कर रहा था

    उनकी कतराती हसीं के पीछे..... छिपी कहानी को गढ़ रहा था,

    उनके काजल का रंग भी आज रंग फीका था

    जिसे देख मैं जीता था,

    गालो पर थी थोड़ी लाली

    पर कानो में नही थी वो बाली,

    जिसे ज़ुल्फोन में घुमा मैं छेड़ता था........

    253
  • परवाह करके बेपरवाह क्यूँ छोड़ जाते हो

    परवाह करके बेपरवाह क्यूँ छोड़ जाते हो

    समुंदर के किनारे बिठा कर

    पानी का रुख़ क्यूँ मोड़ जाते हो,

    तुम्हारा साथ ........ ही हमारी असली दावा है

    बिन तुम्हारे मंज़िल को ताकना भी एक सज़ा है,

    सब्र को तो हम फिर बाँध लेंगे

    तुम पियार से पुकार कर देखो

    कदमों को वहीं थाम लेंगें ..........

    254
  • अजीब सी है उलझन

    अजीब सी है उलझन

    धुंधला सा दिखता.... आज दर्पण,

    सवाल हैं

    जवाब नहीं,

    255
  • बात सिर्फ़ समझने की है

    बात सिर्फ़ समझने की है

    चाहे प्रकृति से या खिलोने से

    बिना ठोकर खाए

    समझ आए,

    256
  • इजाज़त नही दूँगी तुम्हें अब दिन में मिलने आने की

    इजाज़त नही दूँगी तुम्हें 
    अब दिन में मिलने आने की
    सपनों .........
    मुझसे मिलने सिर्फ़ नींद में आया करो

    257
  • ये केसा मोह का दल दल है

    ये केसा मोह का दल दल है

    जिसमें कोई संतुष्ट नहीं,

    एक लालसा की अग्नि है

    जो हर पल भड़ती जाती है

    258
  • ख्वाहिशे बेकसूर हैं

    ख्वाहिशे बेकसूर हैं

    उन्हें नही पता

    कि हम मजबूर हैं

    259
  • सवाल करते रिश्ते की क्या ज़रुरूई है?

    सवाल करते रिश्ते 
    की क्या ज़रुरूई है?

    किसी के पास होना
    या उसके साथ होना

    260
  • माँ के हिस्से में आँसू क्यूँ आ जातें हैं

    माँ के हिस्से में आँसू क्यूँ आ जातें हैं
    जब बच्चे बड़े होते जाते हैं
    काश समझे कोई इस बात को
    कुछ पल के लिए ही सही
    पर समझे माँ के एहसास को.............

    261
  • मुझे खुद से मिलवाने के लिया तेरा शुक्रिया

    मुझे खुद से मिलवाने के लिया तेरा शुक्रिया
    किस तरह अदा कारू
    मैं तो अधूरी जी रही थी
    सपनो को सिर्फ़ सी रही थी

    262
  • सिखाता है पानी किस तरह अपनी जगह बनानी

    सिखाता है पानी

    किस तरह अपनी जगह बनानी

    बहते चले जाओ

    जैसे हो निर्झर झरना

    जहाँ मिले जगह 

    थमना 

    263
  • तज़ुर्बे ज़िंदगी के हर पल हमे सीखते हैं

    तज़ुर्बे ज़िंदगी के हर पल हमे सीखते हैं

    कुछ अपनो के पास ले जाते हैं

    कुछ अपनो को पास ले आतें हैं...........

    264
  • समुंदर की गहराई माँ के आँचल की लंबाई

    समुंदर की गहराई

    माँ के आँचल की लंबाई

    कभी नापने की कोशिश मत करना


    265
  • कहाँ कहाँ घूम रहा हूँ

    कहाँ कहाँ घूम रहा हूँ
    दर बदर तुझे ढूड़ रहा हूँ
    हर एक तिनके से ......भी तेरी खबर माँग
    गवाह है सूरज ...और चाँद,

    266
  • देह्शिय्त मौत की नहीं ख़ौफ़ ज़िंदगी का सताता है

    देह्शिय्त मौत की नहीं

    ख़ौफ़ ज़िंदगी का सताता है

    ए खुदा के बंदे जो तेरे हाथ मैं नहीं

    तू सोच कर उसके बारे में

    267
  • गुरु की शान गुरु का गुणगान

    गुरु की शान
    गुरु का गुणगान
    गुरु की महिमा
    गुरु का सम्मान 

    268
  • सूरज की किरने रास्ता ढूंडे कभी खिड़की से झाँके तुझे कभी तेरी मुंडेर पर झूमें, तेरे इंतेज़ार

    सूरज की किरने रास्ता ढूंडे

    कभी खिड़की से झाँके तुझे

    कभी तेरी मुंडेर पर झूमें,

    तेरे इंतेज़ार मैं

    तू छुपी बैठी है किसकी आड़ में

    की तुझे ज़िंदा होना है

    तुझे फिर परिंदा होना,

    क्युकि तूफ़ानो से डर कर बैठा नहीं करते

    उन किताबो के पन्नो को मोड़ आगे भड़ते,

    जब वक़्त आता है तब कफ्न भी पहनने देता हूँ

    पर इसतरह जलने नही देता हूँ

    269
  • तुम कहो मैं सुनु किताब के हर पन्ने में एक कहानी रचु,

    तुम कहो
    मैं सुनु
    किताब के हर पन्ने में
    एक कहानी रचु,
    .......

    270
  • सवालों के कठग्रे में खड़े रहना चाहते है हम क्योंकि

    सवालों के कठग्रे में खड़े रहना चाहते है हम
    क्योंकि 
    जवाब जितने भी मिल जाएँ
    सवाल उतने ही बढ़ाते हैं हम.............

    271
  • तुमसे बेहतर ये तनहाईयाँ हैं बिना बताए छोड़ कर नहीं जाती.....

    तुमसे बेहतर ये तनहाईयाँ हैं

    बिना बताए छोड़ कर नहीं जाती.....

    272
  • किस खुदा की खोज में तू दर दर भटकता

    किस खुदा की खोज में तू दर दर भटकता

    मैं तो तुझ में भी हूँ और उस में भी जो तुझे है खटकता,

    मैं तो संसार के कण कण में हूँ व्यापक

    गौर से देख तेरी नज़रें पहुँचे जहाँ तक,

    273
  • अकेले चलते चलते मंज़िल पर थक गया

    अकेले चलते चलते मंज़िल पर थक गया

    उँचाईओ को छूने की चाह में मन फँस गया,

    मुड़ कर देखा तो मेरा साया भी मुझ पर हँस गया

    जिन्हें तू छोड़ आया है मुसाफिर

    274
  • मेरी प्रार्थना खामोशी को कलम के साथ जोड़ने का प्रयास करती रहूँ

    मेरी प्रार्थना 
    खामोशी को कलम के साथ जोड़ने का प्रयास करती रहूँ
    यही प्रार्थना है मेरी
    उस परमपिता परमेश्वर से,

    275
  • गलत फैमियाँ होना जायज़ हैं

    गलत फैमियाँ होना जायज़ हैं
    क्युकि हम रिश्तों को निभतें हैं
    वक़्त यूँ ही नहीं किसी पर लुटाते हैं

    276
  • ज़िंदगी एक इतेफ़ाक है यूँ कह लो एक मज़ाक है

    ज़िंदगी एक इतेफ़ाक है
    यूँ कह लो एक मज़ाक है,
    कभी वफा देता है
    कभी बेवफा देता है

    277
  • झूम उठता है तन जब भी करती हूँ मन भ्रमण

    झूम उठता है तन

    जब भी करती हूँ

    मन भ्रमण……

    278
  • तेरे आँसुओं की कीमत हम कभी चुका नही पाएँगे

    तेरे आँसुओं की कीमत हम कभी चुका नही पाएँगे
    गुज़ारिश है तुझसे इन्हे इस कदर ना बहा 
    वरना हम तुझे निभा भी नही पाएँगे,
    इसलिए नही की हम कठोर हैं

    279
  • तक़लीफ़ होती है तुझे ऐसे देख,

    तक़लीफ़ होती है

    तुझे ऐसे देख,

    ऐसी कौनसी आग है

    जिसमे रही है खुद को सेक,

    280
  • कोई शाम तेरी याद बिना गुज़रती नही

    कोई शाम तेरी याद बिना गुज़रती नही
    गम ये है कि.........
    तू मुझे मिलती नही........
    तेरा चेहरा मेरे चेहरे का पेहरा है

    281
  • मैने समय से सीखा है

    मैने समय से सीखा है

    जीने का सलीका

    जो पल बीत गया

    वो उस में नही जीता..................

    282
  • बेगुनाह बच्चें बने बेज़ुँबा (आतंकवादी हमलों मैं मारे गए बेगुनाह बच्चों को समर्पित )

    बेगुनाह बच्चें बने बेज़ुँबा    (आतंकवादी हमलों  मैं मारे गए बेगुनाह बच्चों को समर्पित )

     माँ हमारी हर आवाज़ सुनतीथीं

    हमारेलिए अनगिनत सपनो को बुनती थीं,

    283
  • प्रायश्चित एक अनुभव एक बात रखना याद

    प्रायश्चित एक अनुभव

    एक बात रखना याद

    ना करो शॅमा की फरियाद,

    वे तो केवल शब्दो का खेल है

    284
  • मेरी गुहार खुली हवा मैं साँस लेता हूँ

    मेरी गुहार

    खुली हवा मैं साँस लेता हूँ

    फिर क्यूँ धुआँ दिखता है

    ज़मीन पर खड़ा हूँ

    285
  • सोचा एक दिन जी कर देखें तेरे बिन

    सोचा एक दिन जी कर देखें तेरे बिन

    पर क्या बताउँ केसे था काटा,

    जहाँ तक नज़रें थीं

    वहाँ तक था सन्नाटा

    286
  • जिसे तराश्ते रहे अपना बनाने के लिए ज़िंदगी भर

    जिसे तराश्ते रहे अपना बनाने के लिए ज़िंदगी भर

    क्या पता था वो एक दिन हमारी ही लेगा ख़बर,

    समझ नही पाए हम क्या था ये खेल

    और ना ही रख पाए सबर,

    287
  • विषय मिले मुझे कोई भी

    विषय मिले मुझे कोई भी

    मन मेरा सदा अचल रहे,

    सवाल चाहे हो केसा भी

    समाधान उसका ज़रूर मिले

    288
  • वो पल मैं भूल नहीं पाता हूँ

    वो पल मैं भूल नहीं पाता हूँ

    जब ये कदम ज़मीं पर रखता था,

    मुश्किलों से गुज़रता पर फिर भी पार हो निकलता था,

    दिखते कदम हमारे थे

    289
  • एक भारत श्रेष्ट भारत

    एक भारत श्रेष्ट भारत

    देश नहीं मिटने देंगें

    देश नहीं झुकने देंगें ,

    हमारा भारत महान

    290
  • झौंके हवा के कुछ कहते हैं हमें

    झौंके हवा के कुछ कहते हैं हमें

    संग लाई हूँ तेरे लिए कुछ लम्हें,

    खुवाबों में भर ले इन्हे समेट ले ए वीर

    माँ ने तेरी याद मैं फिर बनाई है खीर

    291
  • ए खुदा बता रस्तो को मंज़िलों से मिला

    ए खुदा बता

    रस्तो को मंज़िलों से मिला ,

    तेरे दीदार को निकला हूँ मैं

    छोड़ कर ये जहाँ,

    292
  • मुसाफिर से पूछा तुझे कहाँ जाना है,

    मुसाफिर से पूछा

    तुझे कहाँ जाना है,

    वो मुस्कुराकर बोला

    ए राह दिखाने वाले सहचर ,


    293
  • सुकून के साथ होता है किसका एहसास ?

    सुकून के साथ

    होता है किसका एहसास ?

    विचार करो.............

    कि जिसके पीछे भागते भागते जीवन कर रहे हैं व्यर्थ ?


    294
  • ए खुदा के बंदे तू उनको क्यू देखता है

    ए खुदा के बंदे तू उनको क्यू देखता है

    जो तुझे गिरता देख खुश होते हैं

    देख उनको जो तेरी हर एक हँसी पर मरते हैं

    हो सकता है की जीने की वज़ह ना हो तेरे पास


    295
  • एक प्रधान मंत्री ऐसा भी (नरेंद्र दामोदर दास मोदी )

    एक प्रधान मंत्री ऐसा भी  (नरेंद्र दामोदर दास मोदी )

     एक महान शक्सियत जिसकी हूँमैं भक्त जिसने मिसाल करी कायम

    चाय बेचने से लेकर प्रधान मंत्री बनने का रखना दम,

    जिसे विवेकानंद जी की किताबों ने दी प्रेरणा

    296
  • मशहूर होते हैं वे लोग

    मशहूर होते हैं वे लोग

    जो नाम उँचा कमाते हैं,

    सागर की एक बूँद तो सभी हैं

    सूरज की किरण जाने किस पर पड़ती है.........

    297
  • क्यों सोचते ही रह जाते हैं

    क्यों सोचते ही रह जाते हैं
    करना चाहतें हैं बहुत कुछ
    फिर भी कर नही पाते हैं......

    298
  • कहा था तुमसे कि बहोत पियर करती हूँ

    कहा था तुमसे कि बहोत पियर करती हूँ
    बस बार बार ज़ुबा पर लाने से डरती हूँ
    मनती हू इकरार भी सरे आम नही करती हूँ,
    पर क्या केरू दिवानी हू तुम्हारी इस कदर,

    299
  • कोई साथ हो तो क्या बात हो

    कोई साथ हो तो क्या बात हो,
    पर बातो मैं ना कोई राज़ हो,
    एहसास बन्धते हैं बड़ी ही मुश्किलों से,
    बँध जाएँ गर
    तो समझो.......खुदा के साथ हो......जीवन मैं आबाद हो................

    300
  • लम्हें कहते हैं

    लम्हेंकहतेहैं
    थमजाऐवक्त
    के जीअभीभरानहीं

    301
  • खुद पर ना कर इतना गुमान

    खुद पर ना कर इतना गुमान
    कि खुदा की रहमतो को भाँप ना सके,
    मौत सबको मिटी मे हे मिलती है
    क्या सोचता है तू खुले आकाश के तले

    302
  • वक़्त के साथ खेलने की कोशिश मे जब नाकाम हुए, तभ समझ आया

    वक़्त के साथ खेलने की कोशिश मे जब नाकाम हुए,
    तभ समझ आया
    कितना भी पैसा हो.....पर वक़्त के लिया हम सब की तरह आम हुए,
    बावजूद इसके भी घमंड का साथ ना छूटा

    303
  • आज फिर माँ की गोद मे सिर रख कर सोने का

    आज फिर माँ की गोद मे सिर रख कर सोने का
    मान करता है,
    भागती हुई इस ज़िंदगी मे कुछ पल अपना होने को मान करता है,
    शायद घड़ा बहुत भर गया है

    304
  • जि़न्दगी के कुछ पलों को फिर ढूँढने निकला था मैं

    जि़न्दगी के कुछ पलों को फिर ढूँढने
    निकला था मैं
    हर मोड़ पर कुछ कदम फिसला था मैं
    ना जाने क्या कुरेदना चाहता था ओर क्यों

    305
  • रगो में खून दौड़ता है

    रगो में खून दौड़ता है
    हमारे भी उनके भी]
    फिर क्यों है हम भिन्न
    क्यों बदल गए हमारे पद चिन्ह

    306
  • माँ जीवन मे अनमोल है

    माँ जीवन मे अनमोल है
    माँ मीठे पियार के बोल है,
    माँ अंधेरे का उजाला है
    माँ पियार के रस से भरा पीयाला है

    307
  • आज फिर एक मासूम बच्ची दर्द से कराह रही है

    आज फिर एक मासूम बच्ची
    दर्द से कराह रही है....
    रो रो कर अपनी पीड़ा
    हम सब को सुना रही है...

    308
  • आज एक अजीब सी कश्मक्श मे है दिल फसा हुआ,

    आज एक अजीब सी कश्मक्श मे है दिल फसा हुआ,
    आगे कदम रखा तो एक नया सवाल इंतज़ार मे था जना हुआ,
    कुछ समझ नही पाई , केसी थी उलझन और उसमे क्या था बुना हुआ,

    309
  • जाने सफ़र किसका कितना लंबा है

    जाने सफ़र किसका कितना लंबा है,
    ये जानते हुए भी हर शाकस जीता अँधा है,
    जब छूट जाता है
    तब समझ आता है,

    310
  • एक दास्तान सुनती हूँ, अनचाहा आईना दिखती हूँ

    एक दास्तान सुनती हूँ,
    अनचाहा आईना दिखती हूँ
    जिसमे है हमारी पहचान छिपी
    मैं उससे परिचय करवाती हूँ,

    311
  • आँसुओं के बेह्ते तक्दीर खुद ब खुद तस्वीर बन गई

    आँसुओं के बेह्ते
    तक्दीर खुद ब खुद तस्वीर बन गई,
    बहोत कोशिश की फिर बदलने की
    पर वो तस्‍वीर शीशे मे जड़ गई,

    312
  • जब किसी दुहीता कि कारण वश शादी नही हो पती

    जब किसी दुहीता कि कारण वश शादी नही हो पती
    किस प्रकार वो हर पल मरती या मारी जाती,
    पर उसकी पीड़ा समझता नही कोई
    ताने ,उल्हाने ना जाने

    313
  • एक महान शक्सिहत को शत शत प्रणाम

    एक महान शक्सिहत को शत शत प्रणाम
    जो छोड़ गए हमारे लिए अनगिनत पैगाम,
    क्या क्या दोहराए,क्या क्या बतलाए,
    दो पंक्तियाँ समर्पित करते हैं उनकी याद मे....

    314
  • सलामत रहे दोस्ती हम सब की कुछ इस तरह.....

    सलामत रहे दोस्ती हम सब की
    कुछ इस तरह......
    खुशी हो तो मनाए साथ,
    गम हो तो भड़ाए हाथ..

    315
  • मैं नही कह पाई पर तुम तो कह सकते थे

    मैं नही कह पाई
    पर तुम तो कह सकते थे,
    जो बात दिल मे थी
    उसे ज़ुबा पर रख सकते थे

    316
  • निकली हूँ आज लेकर अपना पिटारा शायद किसी के काम आ जाए

    निकली हूँ आज लेकर अपना पिटारा
    शायद किसी के काम आ जाए
    और मिल जाए मेरे खुवाबो को किनारा,

    317
  • भीगी भीगी तेरी पलके जब मेरे आँचल मे छलके

    भीगी भीगी तेरी पलके
    जब मेरे आँचल मे छलके ,
    मुझे डुबो देती है .........आख़िर
    तू कह क्यू नही देती है

    318
  • ये वक़्त तेज़ी से भाग रहा है , या हम........?

    ये वक़्त तेज़ी से भाग रहा है ,
    या हम..........?
    कम्बख़्त समझ नही पाती
    आख़िर
    किसमे है दम....

    319
  • हर कदम पर साथ चलना

    हर कदम पर साथ चलना
    बात नही हाथो मे हाथ रखना,
    लवज़ो से कह ही नही पाऊँगा
    मेरी आवाज़ नही .....खामोशी को पढ़ना

    320
  • वक़्त कम्बक़्त क्या क्या दिखता है

    वक़्त कम्बक़्त
    क्या क्या दिखता है,
    जो सागर को मिंटो मे पार कर लेता था
    आज वो किनारे पर बैठ सागर मे बूँद बढ़ता है......

    321
  • अब हर पल लगता हैं बेज़ुबान

    अब हर पल लगता हैं बेज़ुबान
    जाने वो वक़्त गया कहाँ ,
    जिसकी हर नोक पर मैं थिरकति थी
    हर लम्हे का लुफ्ट उठा उसमे जीती थी

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