May 2017

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May

कितना दर्द है तेरी आँखों में… जिसे देख कर भी हम अनदेखा कर देते हैं

कितना दर्द है तेरी आँखों में जिसे देख कर भी हम अनदेखा कर देते हैं, इस बनावटी दुनिया में जीने के लिए तेरे घाव को हम झूठी मल्हम से भर देते हैं, घाव तेरे सूख जातें होंगे पर मिट ते नहीं ख़ुदग़रज़ो की इस दुनिया में फिर उभर जाते होंगे पर वो उनको दिखते नहीं यही तो खेल है असल

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8
May

कलम सब कहती है वो जो दिल में है जुबाँ पर नहीं

कलम सब कहती है वो जो दिल में है जुबाँ पर नहीं सुनाती है लिख कर दास्तान वही, थे हम बेखबर अनगिनत सवालों के लिए दिल में भँवर, नसीब से लगी जब कलम हाथ मानो मिल गया वो जिसमें खुदा का है वास, फिर क्या था स्याही से भरी थी मेरी कलम बारिश में नहा कर घुल गए हम, मन

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8
May

बेगुनाह बच्चें बने बेज़ुँबा (आतंकवादी हमलों मैं मारे गए बेगुनाह बच्चों को समर्पित )

माँ हमारी हर आवाज़ सुनती थीं हमारे लिए अनगिनत सपनो को बुनती थीं, सब सपने चकना चूर हो गए ज़ालिमो के हाथो मरने पर हम मजबूर हो गए, अब पिता के कंधों पर हमारी अरथी थी माँ हर आहट से डरती थी, क्योंकि पालती थी वो जिसे बड़े नज़ो से खिलती थी जिसे अपने हाथो से, आज उसे ही कफ़न

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8
May

प्रायश्चित एक अनुभव … एक बात रखना याद

प्रायश्चित एक अनुभव   एक बात रखना याद ना करो शॅमा की फरियाद, वे तो केवल शब्दो का खेल है जिसमे ना होता दिलो का मेल है, क्योंकि कोई कभी कुछ नही भूलता ये एक ऐसा तराज़ू है जिसमे इंसान हर पल है झूलता, फिर मौका मिलने पर मन मे भरी कड़वाहट संग.. अगला पिछला सब कबूलता, इसलिए शॅमा ही

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8
May

मेरी गुहार खुली हवा मैं साँस लेता हूँ

मेरी गुहार खुली हवा मैं साँस लेता हूँ फिर क्यूँ धुआँ दिखता है ज़मीन पर खड़ा हूँ पर कुआँ दिखता है, रास्तों पर चलता हूँ तो लगता है फिसलता हूँ, काँटे चुभते हैं पैरों में पर चप्पल मैं सुराक नहीं दिखता हैं, हर चीज़ है मौजूद पर जाने क्यूँ नहीं है कोई वजूद , जेब मे हैं पैसे खरचने को

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8
May

सोचा एक दिन जी कर देखें तेरे बिन पर क्या बताउँ केसे था काटा,

सोचा एक दिन जी कर देखें तेरे बिन पर क्या बताउँ केसे था काटा, जहाँ तक नज़रें थीं वहाँ तक था सन्नाटा , हर चीज़ अपनी जगह पर ही थीं पर उजाले मे कमी थी, प्रतिदिन की भाँती निरंतर चल रहा था सब पर इल्म ना हुआ कि कब दिन शुरू और ख़तम हुआ कब, कुछ ही घंटे काफ़ी रहे

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8
May

जिसे तराश्ते रहे अपना बनाने के लिए ज़िंदगी भर

जिसे तराश्ते रहे अपना बनाने के लिए ज़िंदगी भर क्या पता था वो एक दिन हमारी ही लेगा ख़बर, समझ नही पाए हम क्या था ये खेल और ना ही रख पाए सबर, क्युकि हालात के ही हाथों ठोकर खाई थी अपनो से ही मिली जुदाई थी, जिसके लिए हमने हर चीज़ ठुकराई थी उस ही ने हमारी इज़्ज़त सरे

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8
May

विषय मिले मुझे कोई भी

विषय मिले मुझे कोई भी मन मेरा सदा अचल रहे, सवाल चाहे हो केसा भी समाधान उसका ज़रूर मिले, कभी ना घबराउँ कभी ना डगमगाउँ कदम रखूँ चाहे काटो पर , मुस्कान मेरी बनी रहे बस मेरा देश मुझ पर गर्व करें ऐसे मेरे कर्म रहे , खुवाब है मेरा स्वर्ग बने भारत स्वदेश प्रेम कण कण मैं बसे, ऐसा

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8
May

वो पल मैं भूल नहीं पाता हूँ

वो पल मैं भूल नहीं पाता हूँ जब ये कदम ज़मीं पर रखता था, मुश्किलों से गुज़रता , पर फिर भी पार हो निकलता था, दिखते कदम हमारे थे पर क्या पाता था हमें गोद में हम तुम्हारे थे, ऐसी है मेरे गुरु की प्रेम की डोरी जो हर पल मुझे सरहाती है प्रेम से चोरी चोरी, जिनके लिए कोई

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8
May

एक भारत श्रेष्ट भारत

एक भारत श्रेष्ट भारत देश नहीं मिटने देंगें देश नहीं झुकने देंगें , हमारा भारत महान केरेगा उत्थान , जिसके लिए हम सब मिलकर करेंगें काम बनाएँगे नई पहचान , ह्म देश के नागरिक नहीं देश के सेवक हैं, अंधेरे मैं उम्मीद नहीं अंधेरे मैं दीपक हैं, आज यहाँ आप सब के समक्ष अपना विश्वास देने और आपका लेने आया

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