September 2015

10
Sep

नज़ाने केसा समय आने वाला है

नज़ाने केसा समय आने वाला है
धूप मैं भी अब सब दिखता काला है,

10
Sep

ज़िंदगी है एक पियास

ज़िंदगी है एक पियास
अधूरे को पूरा करने की आस

10
Sep

भरनी है उड़ान

भरनी है उड़ान
छूना है आसमान,

10
Sep

पलके झपक झपक कर

पलके झपक झपक कर
इंतेज़ार कर रही हैं,

10
Sep

ए खुदा इतने पियार करने वाले क्यू दे दिए …..

ए खुदा इतने पियार करने वाले क्यू दे दिए …..
फिर जीने की इच्छा करने लगी……………

10
Sep

जाने मन क्या कहता है

जाने मन क्या कहता है
किस गुफ्तगू मे रहता है,
मेरा साथ देने की बजाए

10
Sep

करमो की गठरी ने कुछ इस तरह पलटी मारी

करमो की गठरी ने कुछ इस तरह पलटी मारी
कि दूर हो गई वो सब चीज़ जो लगती थी पिया री…
..इसलिए अब

10
Sep

क्या खूब लिखता है मन

क्या खूब लिखता है मन,
जब हाथ मैं होती है कलम,
सामने तेरा चेहरा,

10
Sep

वक़्त के साथ खेलने की कोशिश मे जब नाकाम हुए

वक़्त के साथ खेलने की कोशिश मे जब नाकाम हुए,
तभ समझ आया
कितना भी पैसा हो…..पर वक़्त के लिया हम सब की तरह आम हुए,

10
Sep

आज फिर माँ की गोद मे सिर रख कर सोने का मान करता है

आज फिर माँ की गोद मे सिर रख कर सोने का
मान करता है,
भागती हुई इस ज़िंदगी मे कुछ पल अपना होने को मान करता है,