रूह ने रूह का स्वागत किया जैसे ही मन ने उसको पुकारा पिया

रूह ने रूह का स्वागत किया

जैसे ही मन ने उसको पुकारा पिया ,

साँसों की तरंगे उफान पर चॅढी

आज खुवाहिशे आसमान की ओर बढ़ी ,

लगा वक़्त आज मेरे हाथ में है

क्योंकि वो मेरे साथ में है ,

ज़िंदगी मुझसे खुश थी

या मैं ज़िंदगी से………………

ये नही पता …….

जहाँ भी देख रही थी

दिख रहा था खुदा ………….

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