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Sonali singhal

A Dedicated Mother a Passioate Hindi Creative Writer, Fond of Writing Poetry, Play's, Songs and Short Scripts. Producer/Director of Short Film Consultant for Children (Art and Cultural Activities)

  • कहाँ गई वो खुश्बू जो हर पल में घुली थी

    कहाँ गई वो खुश्बू

    जो हर पल में घुली थी

    अपनो से मिली थी ,

    हर लम्हें को मुस्कान का जाम समझ जीते थे

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  • वक़्त की तालीम भरी है शिक्षा से

    वक़्त की तालीम भरी है शिक्षा से 
    पर हम जीना चाहते हैं भिक्षा से

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    2
  • रिश्तों को किसी की नज़र लगी है

    रिश्तों को किसी की नज़र लगी है

    इस बेबुनियादी सोच पर यकीं कर हमारी सोच पर बरफ जमी है

    पिगल कर बह जाए

    तो हमें हमारी खामियाँ नज़र आ जाए

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  • जाने ज़िंदगी किस भीड़ में खो गई

    जाने ज़िंदगी किस भीड़ में खो गई 

    एक वक़्त था जब अपनी थी 

    आज चिंताओं की हो गई ,

    जो पल बेफ़िक्र जीते थे 

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  • कभी मैं तुमसे अनुरोध करता हूँ

    कभी मैं तुमसे अनुरोध करता हूँ

    कभी मैं तुम्हारा विरोध करता हूँ,

    मैं अपने फ़र्ज़ से पीछे नही हटना चाहता हूँ

    मैं तुम्हे निरंतर देना चाहता हूँ,

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  • ज़िंदगी की ख़ासियत है

    ज़िंदगी की ख़ासियत है 
    जब तक माँ बाबा का साथ है 
    चाहे जीवन में कोई भी परिस्थिति आए
    दो शक्स हैं धरती पर जिनका सदेव सिर पर हाथ है

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  • एक दिन गुस्से में मैं , माँ से यूही कह गया

    एक दिन गुस्से में मैं माँ से यूही कह गया

    कि तू मुझे समझती नही ,

    माँ चुप खड़ी मेरी सारी बात सुनती रही

    माँ से जवाब ना मिलने पर

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  • कभी उलझी भी है कभी सुलझी भी है

    कभी उलझी भी है

    कभी सुलझी भी है

    कभी मेरे हाथ में तुलसी भी है

    पर गुज़रते हालत में कई बार मैं खुद को संभाल नही पाता हूँ

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    8
  • ताक़त को मेरी तुम क्यों

    ताक़त को मेरी तुम क्यों

    आज़माना चाहते हो,

    कह तो रहा हूँ मैं कमज़ोर नही

    बस तू मेरी कमज़ोरी हो...........

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  • आँखें हर पल भीगी थी

    आँखें हर पल भीगी थी

    कैसी वक़्त की उलझनहै

    लाल रंग से बनी दुल्हन है ,

    ठिकाना मिल रहा है

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  • कविताओं के रास्ते हमनेजीवन खिलाया है

    कविताओं के रास्ते हमनेजीवन खिलाया है

    जो कह नही पाते थेवो लिख कर बताया है ,

    इशारा था जिनकी ओरउन्होने पढ़ कर भी नज़र अंदाज़ सा ताल्लुफ जताया है

    और जो दिल से हमें चाहते थे अपना मानते थे

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  • मैं बन कबीरा उठना चाहता हूँ जग क बीड़ा

    मैं बन कबीरा

    उठना चाहता हूँ जग क बीड़ा

    कहाँ से शुरू करूँ

    कोई बतलादे बन गुरु ,

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